माँ दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा । चैत्र नवरात्र का माहात्म्य व भारतीय नववर्ष का प्रारंभ।। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा का माहात्म्य । Significance of Chaitra Navratri. 9 forms of Maa Durga.

 


आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का विशेष समय होता है और हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तक चलता है।



चैत्र नवरात्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और हवन-पूजन करते हैं। इस अवसर पर घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।


इस वर्ष 2025 में चैत्र नवरात्र 30 मार्च से 7 अप्रैल तक मनाए जाएंगे। राम नवमी, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, इस बार 7 अप्रैल को होगी।


चैत्र नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के 9 प्रमुख स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। इनके अलावा माँ दुर्गा के एक और स्वरूप का वर्णन किया जाता है, जिससे ये कुल 10 स्वरूप हो जाते हैं। आइए इन सभी के बारे में विस्तार से जानते हैं—


नवदुर्गा (9 स्वरूप)


1. माँ शैलपुत्री – ये हिमालय राज की पुत्री हैं और नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा की जाती है। इनके हाथ में त्रिशूल और कमल होता है।



2. माँ ब्रह्मचारिणी – ये तपस्या की देवी हैं और इन्हें ज्ञान, संयम और त्याग की प्रतीक माना जाता है।



3. माँ चंद्रघंटा – इनके मस्तक पर अर्धचंद्र स्थित होता है और ये सिंह पर सवार रहती हैं। ये शक्ति और साहस की देवी हैं।



4. माँ कूष्माण्डा – इन्हें ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली देवी माना जाता है। इनका वाहन सिंह होता है।



5. माँ स्कंदमाता – ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।



6. माँ कात्यायनी – ये महिषासुर का वध करने वाली शक्ति हैं। इनका वाहन सिंह है और ये वीरता की प्रतीक हैं।



7. माँ कालरात्रि – ये काले रंग की हैं और इनके चार हाथ होते हैं। ये बुरी शक्तियों को नष्ट करने वाली देवी मानी जाती हैं।



8. माँ महागौरी – ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और इनका स्वरूप अत्यंत सौम्य व शांतिपूर्ण होता है।



9. माँ सिद्धिदात्री – ये सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। इनकी उपासना से भक्त को आध्यात्मिक और सांसारिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है।




दसवां स्वरूप – माँ दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी)


माँ दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी पूजा जाता है। इस स्वरूप में माँ ने महिषासुर का वध किया था। ये दसों दिशाओं की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं और इन्हें संपूर्ण शक्ति का स्वरूप कहा जाता है।


चैत्र नवरात्रि में इन 10 स्वरूपों की आराधना से भक्तों को शक्ति, ज्ञान, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। 

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