बीजेपी उपाध्यक्ष का बड़ा खुलासा, पुरोला, बड़कोट व मोरी तहसील के अंतर्गत यूपी/ उत्तराखंड सहित बाहरी राज्य के लोगों ने हजारों नाली कृषि भूमि का किया अधिग्रहण । एग्री कम्पनियां बनाकर भूमाफियायो ने कानूनी प्रक्रिया के तहत किया अधिग्रहण । Big disclosure of BJP Vice President, people from outside states including UP/Uttarakhand acquired thousands of drain agricultural lands under Purola, Barkot and Mori tehsils. Land mafia acquired land through legal process by forming agri companies.

 रघुवीर सिंह पंवार, बीजेपी मण्डल उपाध्यक्ष पुरोला के व्हाट्सएप चैट से ,

पुरोला और बड़कोट तहसील के अन्तर्गत इन दिनों  बाहरी राज्यों से आए लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में भूमी खरीद–फरोख्त का कार्य बड़े स्केल पर किया जा रहा है। कुछ लोग एग्रो कंपनीयां बना कर तो कुछ व्यक्तिगत ही 28 से 30 सालों की लीज पर जमीनों की खरीद–फरोख्त कर/अधिग्रहण कर रहे हैं। जिससे स्थानीय स्तर पर भूमि की डेमोग्राफी बदलने के पुरे आसार नज़र आते दिख रहे हैं। एक मोटे आंकड़े के अनुसार दो वर्षों में अभी तक करीब दो दर्जन गावों से लगभग 9 हज़ार नाली से भी अधिक  भूमि की औने पौने दामों पर खरीद फरोख्त हो चुकी है। इस ख़रीद फरोख्त में कुछ स्थानीय ग्रामीणों से लेकर राजस्व कर्मियों का भी भरपूर सहयोग खरीददारों को मिल रहा है।

सांकेतिक फोटो


राज्य में भू–कानून और मूल निवास की मांग यों ही नहीं उठ रही है। प्रदेश के कई गावों में औने पौने दामों पर भोले भाले ग्रामीणों की जमीनों को कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है।जो कास्तकार जमीन बेचने को रजामंद नहीं हो रहा है तो उसको गांव के ही बिचौलियों के माध्यम से उस ज़मीन को 28 से 30 सालों की लीज में दिला कर उसका सौदा भी बनवा दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार नौरी गांव में तीन केश तो ऐसे आए थे जिनको 3 नाली भूमि का भुगतान किया गया और रजिस्ट्री 15 नाली की कर डाली बाद में पता चलने पर विवाद की स्थिति को भांपते हुए अतिरिक्त हुई रजिस्ट्री कैंसिल करवा दी गई। इतना ही नहीं इस भूमि ख़रीद फरोख्त के लिए खरीददारों ने 80 से 90 प्रतिशत भुगतान भी कैश/ नगद धनराशि देकर ही किया जो अपने आप में प्रधानमन्त्री मोदी के काले धन पर रोक थाम को भी गलत ही साबित कर रहा है। अब लाख टके का सवाल ये उठता है की इतनी बड़ी मात्रा में ये पैसा किसका है और उसका श्रोत कहां है?



पुरोला ,बड़कोट और मोरी तहसील के अन्तर्गत निम्न गांवों में खरीदी गई भूमी –


1.नौरी गांव में लगभग 300 नाली भूमि खरीदी गई।


2.बीचला मठ गांव में लगभग 500 नाली भूमि खरीदी गई।


3. कोटला गांव लगभग 500 नाली भूमि खरीदी गई।


4. जखाली गांव लगभग 1500 नाली भूमि खरीदी गई।


5. धौंसाली गांव लगभग 200 नाली भूमि खरीदी गई।


6.  डिंगाड़ी गांव में लगभग 100 नाली भूमि खरीदी गई।


7. बियालि गांव में लगभग 750 नाली से भी अधिक।


8. कंडियाल गांव (बैइना) 250 नाली भूमि।


9.  स्वील गांव में 1200 नाली भूमि 30 साल की लीज पर।


10. कुफारा 150 नाली भूमि लीज पर।


11. मैराना लगभग 70 नाली भूमि लीज पर।


12. सारीगाड़ 150 नाली भूमि लीज पर।


13.सरनौल गांव में भी लगभग 200 नाली भूमि अधिग्रहण किया गया।


14. ढोखरियाणी कंडीया लगभग 50 नाली भूमि।


15. कुमोला पूजेली लगभग 150 नाली भूमि।


16. खलाड़ी लगभग 500 नाली भूमि लीज पर।


17. देवरा /गेंचवाण गांव में लगभग 2000 नाली से अधिक भूमि बिक्री/लीज पर दे दी गई है।


18. पुजेली (भित्री) 1500 नाली भूमि बिक्री।


टोटल –18 गावों में 8,870 नाली भूमि अनुमानित अधिग्रहण की जा चुकी है 


इसके अलावा भी कई गावों में भूमि अधिग्रहण कर लिया गया है यह आंकड़े तो उन गांवों के हैं ।जहां पलायन जीरो प्रतिशत है। और पूरी आबादी गांवों में ही निवास करती है। और इनका मुख्य व्यवसाय भी कृषि पर ही निर्भर है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिन गांवों से पलायन हो गया होगा। उन गांवों में भूमि की डेमोग्राफी क्या हो सकती है?



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