गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला
क्या पता इस खबर के प्रकाशित होने से पहले ही डीएफओ डॉ अभिलाषा सिंह का ट्रांसफर हो जाय पर इससे समस्या का समाधान नही होने वाला है । पुरोला विधायक दुर्गेश लाल ने कभी भी वन कानूनों की वजह से पार्क क्षेत्र के 42 गांवों के हक हकूकों का मुद्दा नही उठाया पर सस्ती लोकप्रियता को हासिल करने के लिए डीएफओ बदलने की बात कर रहे हैं ।
हमारा सवाल है कि अगर गोविंद नेशनल पार्क की मौजूदा उप निदेशक के स्थान पर फिर कोई ईमानदार व कानून का अक्षरस अनुपालन करने वाला डीएफओ की तैनाती की जाती है तो पार्क के 42 गांवों की ये समस्या ज्यो की त्यों कायम रहेगी ।
विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों के अनुसार धरने पर बैठे विधायक दुर्गेश ने मंत्री सुबोध पर जातिवाद का आरोप लगाया है । मंत्री सुबोध ने इन आरोपों को सिरे से खारिज भी किया है । उन्होंने यहां तक कह है कि जिस कागज पर उन्होंने मामले की जांच करने को लिखा वो कागज उन्होंने वही पर फाड़ दिया ।
अब सवाल ये है कि जिस बीजेपी में पार्टी अनुशासन का बड़ा भय होता है , उस पार्टी में विधायक सरेआम धरने पर बैठे ये बड़ी गुटबाजी का संकेत तो नही है । क्या डीएफओ अभिलाषा सिंह से जनता वाकई परेशान है । ये जांच का विषय है लेकिन इतना जगजाहिर है कि जब से पुरोला विधानसभा के अंतर्गत बतौर डीएफओ केके दंपति की नियुक्ति हुई है तब से वन माफिया कहि दुबक से गये है ।
खैर नमोन्यूज गोविंद नेशनल पार्क के 42 गांवो के हक हकूकों की लड़ाई विगत 9 वर्षो से लड़ रही है व आगे भी जनहित को सर्वोपरि मानते हुए विधायक दुर्गेश से अनुरोध करती है कि ये लड़ाई सदन के भीतर की है न कि किसी मंत्री के घर पर धरने की ।

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