प्राइवेट बैंक आईसीआईसी के शुद्ध लाभ में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी व यस बैंक के मुनाफे में 47 प्रतिशत बढ़ोतरी का भारत की आर्थिक बदहाली से कैसे संबंध है ।

प्राइवेट क्षेत्र के बैंक आईसीआईसीआई ने तिमाही नतीजे घोषित कर 35.8% लाभ में शुद्व वृद्धि की है । वही विगत वर्षों में चर्चाओं में रहे यस बैंक ने तिमाही शुद्ध लाभ में 47% की वृद्धि दर्ज की है ।




उपरोक्त आलेख को भारत मे प्राइवेट बैंकों के प्रसार व पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी द्वारा प्राइवेट बैंकों व विमा संस्थानों के सरकारी करण को लेकर जिक्र हो रहा है ।

स्वर्गीय इंदिरा गांधी द्वारा प्राइवेट बैंकों को खत्म करने से लेकर 1991 तक भारत आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया । यहां तक कि इस बीच जितने भी प्रधानमंत्री बने उन सभी को अक्सर वर्ल्ड बैंक व आईएमएफ के आगे झुकना पड़ता था ।

भारत की इस आर्थिक बदहाली के पीछे सर्वाधिक अहम रोल प्राइवेट बैंकों व बीमा संस्थाओं का सरकार द्वारा अधिकरण था । कारण सरकार ने जनता का पेट नारो से भरने के लिए इस तरह के आत्मघाती कदम उठाये थे । जो प्राइवेट संस्थान रोजगार का एक बड़ा माध्यम थे उन्हें खत्म कर तत्कालीन सरकार ने खजाने को गरीबी मिटाने के नारों की लोक लुभावन योजनाओं में खत्म कर दिया ।

स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने अपने पिता स्वर्गीय नेहरू से उलट की नीति अपनाई थी । जहां नेहरू काल मे सरकारी उधोग धंधों के साथ - साथ प्राइवेट क्षेत्र के उधोग धंधों को मजबूती देने की रणनीति अपनाई वही इंदिरा गांधी ने प्राइवेट क्षेत्र को खत्म करने की रणनीति अपनाई । फलस्वरूप भारत आर्थिक रूप से बदहाल हो गया व सोने की चिड़िया अब एक स्वप्न रह गया ।

इंदिरा गांधी द्वारा अपनाई गई नीति से भारत आर्तिक रूप से जापान, सिंगापुर व चीन जैसे देशों से अत्यधिक पिछड़ गया व भारत मे व्यापक गरीबी बेरोजगारी फैल गई ।

खैर ये सब 1991 तक योहि चलता रहा , सरकारें जनता का पेट गरीबी हटाओ जैसे नारो से भरते रहे व जनता आर्थिक रूप से बदहाल होती गई ।

1991 में स्वर्गीय नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने व तब सब कुछ बदल गया व प्राइवेट क्षेत्र को विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया , खैर तत्कालीन विपक्ष ने इसकी पुरजोर मुखालत की पर राव आने पथ से नही डिगे ।

इसी कड़ी में स्वर्गीय वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बने व उन्होंने राव की नीतियों को जारी रखते हुए बैंकों व बीमा संस्थाओं में विदेशी निवेश के दरवाजे खोल दिया ।

ये सब को जारी रखते हुए मनमोहन सिंह की सरकार ने बैंकों व बीमा संस्थाओं में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के साथ तमाम आर्थिक नीतियों को लागू की । मनमोहन सिंह ने तमाम चुनोतियो के बावजूद आर्थिक नीतियों को लागू किया । क्योंकि जब भी वे कोई आर्थिक नीति लागू करते पार्टी के भीतर राहुल जैसे लोग उनके लिए चुनौती खड़ी कर देते थे ।

खैर सत्ता बदली व मनमोहन सिंह के स्थान पर मोदी प्रधानमंत्री बने , मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही नरसिम्हा राव द्वारा लागू आर्थिक नीतियों में क्रांतिकारी तेजी आई व भारत विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन गई ।

उपरोक्त आलेख को राहुल गांधी द्वारा अक्सर देशवासियों को अडानी व अम्बानी का नारा देकर बेवकूफ बनाने को लेकर लिखा गया है ।

भारत की व्यापक गरीबी व बेरोजगारी को खत्म करने में प्राइवेट संस्थाओं का महत्वपूर्ण भूमिका है । देश मे व्यापार को बढ़ावा मिलना चाहिए व सरकार का कार्य नियामक का होना चाहिए ना कि दुकानदारी का ।

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