उप जिला अस्पताल पर पुरोला के नेता क्यो थपथपा रहे हैं खुद की पीठ । बेरोजगारों पर हुये लाठीचार्ज पर मौन, दलित- सवर्णों के बीच बंटी खाई पर मौन, ओलावृष्टि व सूखे पर मौन रहने वाले नेताओं के लिए उप जिला अस्पताल कैसे बना विकास की परिभाषा ।

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

 विगत दो दिनों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पुरोला का हर जन मानस तहे दिल से शुक्रिया अदा कर रहा है । शुक्रिया करे भी तो क्यो न करे , कारण जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की नींव स्वर्गीय बीएल जुवांठा ने रखी थी वो वर्षो से उच्चीकरण की राह देखते- देखते खुद एक रेफर सेंटर बन गया था । बरहाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव के वक्त पुनः सत्ता में आने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को उप जिला अस्पताल बनाने की घोषणा की थी उसपर अमल करते हुए सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है ।


स्वर्गीय बीएल जुवांठा के स्वर्गवास के बाद पुरोला की जनता ने कोई लैंडमार्क विकास नही देखा इसलिए उप जिला अस्पताल बनना सचमुच विकास की ओर लंबी छलांग है । पुरोला के अधिकांश नेताओं का मुख्य व्यवसाय ठेकेदारी है जिस कारण सड़को की मरम्मत, नहरों की मरम्मत व सरकारी भवनों की मरम्मत पर यहाँ प्रतिवर्ष करोड़ो का बजट खर्च होता है पर वो कार्य जादा दिन तक टिकता नही इसलिए नेता कभी अपनी पीठ थपथपा नही पाए ।

ऐसे में वर्षो बाद उप जिला अस्पताल के रूप में एक सौगात मिलने पर नेताओं द्वारा खुद की पीठ थपथपाना उचित ही जान पड़ता है ।

खैर खुद की पीठ थपथपाने वाले नेताओं ने कभी यहाँ के एकमात्र डिग्री कॉलेज की फेकल्टी व उच्चीकरण की कभी भी सूद लेना उचित नही समझा । हर नेता कॉलेज के कार्यक्रमो में मुख्य अतिथि बनता जरूर है पर नेता ने न कभी फेकल्टी की बात कही ओर न उच्चीकरण की ।

यहां के किसान विगत 3 वर्षों से ओलावृष्टि, सूखा, अतिवृष्टि व खस्ताहालत नहरों से खुद खस्ताहालत हो गया पर नेताओं ने उनके दुःख में भाषण तक नही दिए । विगत तीन वर्षों से नुकसान के ऊपर नुकसान झेल रहे किसानों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार नेता अब तक जिम्मेदारी लेने को सामने नही आये ।

पुरोला विधानसभा के अंतर्गत नेशनल हाईवे को छोड़ दे तो हर सड़क के मरम्मत पर करोड़ों खर्च हो जाते हैं, नेता खूब कमाई करते हैं ओर बेचारी आम जनता खस्ताहालत सड़को पर चलने को मजबूर हो रही हैं ।

 पेपर लीक मामले में यहां के युवा सड़को पर आंदोलन करते रहे , अभिभावक नेताओं का इंतजार करते रहे कि आकर कुछ कहेंगे पर नेताओं ने कुछ नही कहा ।

कुछ समय पहले पुरोला विधानसभा के अंतर्गत दलितों व सवर्णों के बीच खाई इतनी गहरी हो गई थी कि कुछ लोगो को जेल तक कि यात्रा करनी पड़ गई पर पुरोला विधानसभा के नेताओं ने समय रहते कुछ नही किया अपितु मामले को तूल देने में कोई कसर नही छोड़ी ।

जन समस्याओं से सदेव मुख मोडने वाले पुरोला के नेताओं का उप जिला अस्पताल पर खुद की पीठ थपथपाना उचित ही जान पड़ता है, क्योंकि उन्हें तो सिर्फ खुद का विकास करना आता है , जनता का विकास कैसे होता है ये तो उन्हें मुख्यमंत्री धामी सीखा रहें हैं ।

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