पौध लगाने का समय निकलता जा रहा है क्या करे बागवान । स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उच्च गुणवत्ता की पौधों के स्थान पर बाहरी राज्यों से पौध मंगाने के औचित्य पर सेब बागवान उठा रहे हैं सवाल ।

गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

उत्तराखंड सरकार की अति महत्वकांक्षी एप्पल मिशन  में समय पर उच्च गुणवत्ता की पौधे न मिलना व बाहरी राज्यों से लाई जा रही पौधों को लेकर नाराज किसानों की बैठक ।


 सोमवार को पुरोला क्षेत्र के किसानों ने बैठक कर बाहरी राज्यों से मंगाई जा रही सेब की नर्सरी को लेकर नाराजगी प्रकट की । किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सेब की बागवानी कर रहे किसानों की राय जाने बगैर बाहरी राज्यों की कुछ नर्सरियों से पौधे मंगाई जा रही । किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सेब बागवानी में विशेषज्ञता रखने वाले किसानों की भारी तादात के बावजूद बाहर से बिना उनके स्थलीय निरीक्षण के पौध मंगाई जा रही है । ऐसे में इन पौधों की गुणवत्ता पर स्वतः ही सवालिया निशान लग रहा है ।

 

 सरकार की एप्पल मिशन योजना के अंतर्गत पुरोला क्षेत्र के लगभग 80- 85 काश्तकारों का चयन सेव बगीचों हेतु किया गया है जिसमें कुल 250 का सेब बगीचा तैयार किया जाना है जिसकी लागत लगभग 3 लाख रुपए है। एप्पल मिशन योजना  के अंतर्गत 20% अंशदान काश्तकार द्वारा ₹60000 का ड्राफ्ट लगा दिया गया है जबकि शेष 80% का भुगतान संबंधित विभाग द्वारा नर्सरीयों को किया जाना है ।

किसानों ने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी युवा सेब की नर्सरियां तैयार कर रहे हैं जो कि यहाँ के वातावरण में ही तैयार हो रही है व किसान नर्सरियों में जाकर खुद उनकी गुणवत्ता को देख सकते हैं, बावजूद बाहर की नर्सरियों को थोप कर उनकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान पैदा कर रही हैं । ऊपर से पौध लगाने के समय सर पर होने के बावजूद पौधे न मिलने से किसान बेहद खफा है । किसानों ने कहा कि जिस तरह से सरकार कार्य कर रही है उससे महत्वकांक्षी एप्पल मिशन पर सवाल खड़े हो रहे हैं, योजना किसानों के लिए बनी व फायदा कोई ओर उठा रहा है ।

       बैठक में क्षेत्र से एकत्रित हुए बागवानों श्यालिक राम नौटियाल,कपिल देव,केशव बिजल्वाण , संतलाल, सबल सिंह पंवार,रणवीर सिंह रावत, लोकेश प्रसाद, मनमोहन सिंह,रणवीर सिंह, जसवीर डोटीयाल आदि उपस्थित रहे।

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