पुरोला में एक के बाद एक उजागर हो रहे घोटालेबाजो के कारनामे । अधिनस्त चयन आयोग को अभी भूले नही की टोंस वन प्रभाग के अंतर्गत वन निगम की आड़ में देवता रेंज, कोटिगाड़ रेंज व सांद्रा रेंज में वर्षो से चल रहे देवदार के हरे पेड़ो की अवैध कटान से उठ रहा है पर्दा । पूर्व में 18441 देवदार के स्लीपरों को साजिशन आग के हवाले करने के षड्यंत्र में वन निगम कर्मचारी कर चुके हैं जेल यात्रा ।

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

 पिछले दिनों टोंस वन प्रभाग पुरोला के अंतर्गत उत्तराखंड वन विकास निगम को अलॉट हुए कक्षों के अंतर्गत हुए अवैध पातन की खबर मीडिया में छाई रही । मीडिया में खबर छपने का असर था कि वन विकास निगम के अंतर्गत काम कर रहे ठेकेदार पर कार्यवाही करते हुए विभागीय अधिकारियों ने 8.9 लाख का जुर्माना कर मामले को रफा दफा करने में कोई कोर कसर नही छोड़ी । मामला रफा दफा हो भी जाता लेकिन कहते हैं भ्रष्टाचार करने वाले कितने भी चालाक हो कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं । हुआ यो की देवदार के हरे पेड़ो का अवैध पातन जो वर्षो से चल रहा था को लेकर बंदरबांट में गड़बड़ी के कारण मामला बाहर आया व किसी ने सीएम पोर्टल पर शिकायत कर दी ।

सीएम पोर्टल पर हुई शिकायत के बाद मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक ने अवैध पातन की गंभीरता को देखते हुए 13 जनवरी को दो जांच टीमें गठित कर दी । सहायक वन संरक्षक उत्तरकाशी मयंक गर्ग के नेतृत्व में गठित जांच टीम कोटिगाड़ रेंज के अंतर्गत चिंवा बिट के डोडर कक्ष व सांद्रा रेंज के अंतर्गत हुए अवैध पातन की जॉच का जिम्मा सौंपा गया । सहायक वन संरक्षक  लैंसीडाउन सुधीर कुमार के नेतृत्व में गठित जॉच टीम को देवता रेंज के अंतर्गत हुये अवैध पातन की जांच की जिम्मेदारी दी गई है ।

पूर्व में 18441 स्लीपरों को आग में जलाने के मामले में वन विकास निगम के कर्मचारियों को जेल भेजने के बावजूद नही हुई थी सजा 

पाठकों को ये भी बता दे कि कुछ वर्ष पूर्व भी अवैध पातन के साथ निगम में माल ढुलाई के भाड़े में गड़बड़ी के चलते निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों पर मुकदमे भी दर्ज हुए थे । उक्त मामले में एक तरफ जहां निगम के डिपो पर आग लगाकर से साक्ष्य नष्ट किये गए थे वही जांच में 52 लाख रुपये भाड़े के रूप में मजदूरों पर अवैध रूप से खर्च दिखाया गया था । उक्त मामले में सभी आरोपी बरी हो गये थे व उसके बाद पदोन्नति भी किये गए ।

 अवैध पातन की खबर मीडिया में आने के बाद विभागीय जांचकर्ताओं ने मात्र 37 पेड़ो का अवैध पातन अपनी जांच में पाया । लेकिन मामला बहुत बड़ा है व प्रत्यक्षदर्शियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साक्ष्यो को नष्ट करने के लिए कटे पेड़ो के मुंडो को जड़ से नष्ट किया जा रहा है ताकि  ताकि जांच टीम अवैध पातन की पुष्टि न कर सके ।



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