अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है गोविन्द वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क में अवैध तस्करी व पातन

 मोरी, गोविंद वन्य जीव विहार में  तस्करों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि निकासी की आड़ में जमकर अवैध तस्करी की जा रही है। क्या यह वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा है? बेशक यह जांच का विषय है लेकिन परिस्थितियां इस ओर इशारा जरूर कर रही हैं। 

यहां पांच वन चैक पोस्ट और मोरी और पुरोला पुलिस को चकमा देकर नौगाँव वन विभाग की चैक पोस्ट पर वन संपदा की तस्करी का मामला पकड़ में आया है, जिसने विभाग के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं।

मालूम हो कि गोविंद वन्यजीव पशु विहार आजकल तस्करी के लिए कुख्यात होता जा रहा है। यहां पर वन्यजीव व उनके अंगों से लेकर जड़ी बूटी और अवैध कटान के किस्से आए दिन प्रकाश में आने के बावजूद किसी भी दोषी अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही न होने से उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। निसंदेह इस क्षेत्र में लंबे समय से वन्य जीव व जड़ी बूटी की तस्करी का व्यापार धड़ल्ले से फल फूल रहा है।

ताजा एक मामला मिसाल के रूप में सामने आया है, जिसमें निकासी में नैटवाड से देहरादून के लिए जारी  99 नग कट्टों और बोरा सहित दर्शाए गए है तो शक होने पर   चेकिंग के लिए मुगरसंती रेंज के सौली बैरियर पर रोका गया। चेकिंग में 99 के स्थान पर 184 बोरे पाया जाना इस तथ्य के स्पष्ट प्रमाण है कि नैटवाड़ से सौली तक वन विभाग की नैटवाड़, मोरी, जरमोला, हुड़ोली चेक पोस्ट तथा पुरोला थाना और मोरी थाने को पार करना बिना अधिकारियों के मिलीभगत से संभव नहीं हो सकता है। बहरहाल ट्रक को सीज कर वन अधिनियम व वन्यजीव अधिनियम की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।

इससे पूर्व भी दिसंबर में नैटवाड़ बैरियर पर चेकिंग के दौरान 190 नग जड़ी बूटी, कस्तूरी को अवैध रूप से ले जाते पकड़ा गया था । साथ ही अवैध कटान के कई मामलों के साथ बड़े स्तर पर अवैध खनन पर कार्यवाही हुई थी, परन्तु आला अफसरों से सांठगांठ कर मामले को रफा दफा करने का काम भी हुआ, दोषियों पर कार्यवाही का आज तक प्रमाण नहीं मिला है। जानकारी के अनुसार  सांकरी रेंज में आरा लगे होने की खबर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई, अपितु उच्च स्तर से संरक्षण प्राप्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही न होने से ये अवैध व्यापार खूब फल फूल रहा है। 


विशेष सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली है कि उप निदेशक स्तर के एक चर्चित अफसर द्वारा वन्यजीव तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाता है तथा अवैध कार्यों में संलिप्त कर्मियों को प्रोत्साहन दिया जाता रहा है, जिस कारण तस्करों के हौसले बुलंद है।

 बड़ी बड़ी मशीनों को जब्त किए जाने के बावजूद उक्त अफसर द्वारा आरोपियों को मौखिक आदेश देकर छुड़वाया गया। इस मामले में अभी तक जांच अधिकारी तक नियुक्त नहीं किया गया। इसी तरह दिसंबर 2020 में पकड़ी जड़ी बूटी की निकासी और फीस रसीद भी बिना रेंज अधिकारी के हस्ताक्षर के जारी की गई थी। 

इस मामले में दोषी अधिकारी तथा कर्मचारियों तथा तस्करों के विरुद्ध जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। इससे यह साफ संकेत है कि गोविंद वन्य जीव पशु विहार के कर्ता धर्ता अपनी ऊंची पहुंच के कारण आज भी धड़ल्ले से वन्य जीव विहार में हर तरह के अवैध क्रियाकलापों को प्रोत्साहन दे रहे हैं। 

बताते चलें उक्त अफसर के विरुद्ध पूर्व में कार्यवाही करने के लिए तत्कालीन पीसीसीएफ (हॉफ) जयराज ने निर्देश दिए थे लेकिन उक्त कार्यवाही भी ठंडे बस्ते में पड़ी है।  वर्तमान में कोई भी अधिकारी उनके विरुद्ध कार्यवाही करने से बचता नजर आता है।

 हैरत की बात यह है कि उक्त अफसर के मुख्यालय से गायब होने की खबरें आए दिन सामने आने के बावजूद किसी आला अधिकारी द्वारा उनका स्पष्टीकरण तक नहीं लिया गया। इनके द्वारा प्रभाग में बिना कार्यों के भुगतान किए जाने के मामले भी संज्ञान में आए किंतु शासन व वन विभाग के अधिकारी सब मूकदर्शक बने बैठे हैं। जन प्रतिनिधियों द्वारा इस प्रकार के अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने तथा हटाने को लेकर सरकार तक से गुहार लगाई। उसके बाबजूद उक्त अधिकारी वन्यजीव विहार राष्ट्रीय पार्क में बना हुआ है। 

स्थानीय ग्रामीणों ने विवादित अफसर को तत्काल सेंचुरी एरिया से हटाए जाने की मुख्यमंत्री, वन मंत्री से गुहार लगाई है। ताकि बेशकीमती वन संपदा के रक्षक अपनी जिम्मेदारी के विपरीत भक्षक न बनें।


क्या कहते है अधिकारी


 अपर यमुना वन प्रभाग के मुगरसन्ति रेंज अधिकारी कन्या लाल बेलवाल ने बताया कि सूचना मिलने पर सौली बैरियर पर जड़ी बूटी का एलपी ट्रक चैक किया गया जिसके पास 99 नग बोरो की निकासी का आदेश था जबकि उसमें 184 नग जड़ी बूटी के थे । इसमें 84 नग अवैध पाये गये। ट्रक को सीज करते हुए जड़ी बूटी को कब्जे में ले लिया है और वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।इधर गोविंद वन्य जीव पशु बिहार राष्ट्रीय पार्क के उप निदेशक कोमल सिंह से दूरभाष पर सम्पर्क किया तो उनका फोन स्युच ऑफ था।

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