विधानसभा चुनाव के लिए अभी दो वर्ष बाकी है लेकिन सभी महारथी अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं ।
जहां पूर्व विधायक मालचंद अब अधिकतर समय अपने पैतृक निवास पर रहकर कार्यकर्ताओ से मन्त्रणा कर रहे हैं वही वर्तमान विधायक सेहत ठीक न होने के बावजूद गांव - गांव का भ्रमण कर रहे हैं ।
पूर्व में निर्दलीय लड़े दुर्गेश लाल अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं । ऐसे में हमेशा की तरह भाजपा में अंतिम समय तक टिकट के लिए सस्पेंस बना रहेगा जिसका फायदा वर्तमान विधायक राजकुमार को मिलना तय है ।
ज्ञात हो की पिछले चुनाव में नामांकन के 2 दिन पूर्व तक राजकुमार व मालचंद के बीच टिकट के लिए खीचतान चलती रही जिसकारण अंत मे टिकट मॉलचन्द को मिला व राजकुमार ने अंतिम दिन कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा ।मालचंद को टिकट मिलने से नाराज हुई थी पदाधिकारियो व कार्यकर्ताओं की एक लॉबी ।
मालचंद को टिकट मिलने से भाजपा की एक बड़ी लॉबी जो उनसे कॉफी समय नाराज चल रही थी खुलेआम राजकुमार का प्रचार करने लगी । जिस प्रकार से तमाम भाजपा कार्यकर्ता राजकुमार के साथ आये थे उससे यही लगता था कि इन पर पार्टी हाईकमान का आशीर्वाद भी था ।
अबकी बार परिस्थिति बदल चुकी है भाजपा कार्यकर्ता किसी भी हालत में हाइकमान का कोप भाजन नही बनना चाहेंगे ।
अफवाह तो यहाँ तक है कि चुनाव के वक़्त विधायक राजकुमार भाजपा का दामन थाम चुनाव लड़ेंगे , हकीकत जो भी है पर राजकुमार व मॉलचन्द के बीच पिछली बार की तरह इस बार भी मुकावला रोमांचक होगा ।
पूर्व में चुनाव लड़े दुर्गेश लाल भाजपा का टिकट मिलने की सूरत में ही शायद चुनाव लड़े , अगर बीजेपी दुर्गेशलाल को टिकट देती है तो ऐसे हालात में राजकुमार व मालचन्द के बीच कांग्रेस के टिकट के लिए माथापच्ची होनी तय है ।
हालात यही कहते हैं कि अगर मालचन्द को बीजेपी का टिकट मिलता है तो मुकावला सिर्फ 2 प्रत्याशियों मॉलचन्द व राजकुमार के बीच होगा ।
अगर बीजेपी दुर्गेशलाल को टिकट देती है तो मुकावला त्रिकोणीय होना तय है ।

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