कांग्रेस ने दिखाया राजधानी की सड़कों पर दमखम, मुख्यमंत्री खेमे में लौटी खुसी

 

  • गुरुवार को दिल्ली से दून तक रहा बेचैनी और जोश का शोर

देहरादून। उत्तराखंड के राजनीतिक क्षितिज पर आज दिन-दोपहर चिंता, बेचैनी, आक्रोश, जोश, अटकलें, साजिश और पलटवार का सतरंगी इंद्रधनुष सुबह से ही तन कर खड़ा था। देहरादून और दिल्ली में घोषित-अघोषित युद्ध के बादलों का घेरा। राजनीतिक और न्यायिक पटल पर एक ही मुद्दे पर रोचक संग्राम की कहानी लहरा रही थी। प्रदेश के गांव-गांव की नजर दिल्ली की अदालत पर लगी थी।
देहरादून में हुंकार और ललकार की गूंज थी तो दिल्ली में तर्क और बहस की जोरदार डिबेट। उत्तराखंड सरकार के पैरोकार सुप्रीम कोर्ट में नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय की काट में अपने अनुभव और ज्ञान को ढाल बनाये हुए थे तो देहरादून में एकजुट कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास में घेरा डालने के लिए सड़क पर उतर चुकी थी।


तीन दिन से नए औरयुवा प्रभारी देवेंद्र यादव की मैराथन बैठकों का असर साफ नजर आ रहा था। कार्यकर्ताओं का भारी सैलाब सड़क पर उतर आया। प्रभारी देवेंद्र यादव, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, इंदिरा ह्रदयेश समेत कई नेता कार्यकर्ताओं के साथ कदमताल कर रहे थे।
इसी बीच, कांग्रेस को नारेबाजी के बीच दिल्ली से सीएम कैम्प के लिए राहत भरी खबर भी आई। सुप्रीम कोर्ट के स्टे से सत्ता के गलियारे खुशी से उछल पड़े। दो दिन पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद तक बल्लियों उछल रही टीम एकाएक साइलेंट हो गई। पलटवार के इस खेल में इस बार बाजी त्रिवेंद्र के हाथ लगी।
उधर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बेखबर भाजपा के खिलाफ कांग्रेसी वक्ताओं के जोशीले भाषण उत्साह को चार गुना कर रहे थे। कांग्रेस ने एकजुट होकर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के इस्तीफे की मांग की। गिरफ्तारी के दौर में भी कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे नही हटे। नारेबाजी के साथ बसें भर-भरकर गिरफ्तारी दी।
एक तरफ कांग्रेस की तीन दिन से हो रही बैठकें और उसी समय उच्च न्यायालय का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश आना, यह सब कांग्रेस का एसिड टेस्ट का भी सबब बन गया। प्रभारी देवेंद्र यादव के सामने भी लगे हाथ अपनी टीम का भौतिक सत्यापन हो गया। चुनाव से पहले सड़क पर प्रदर्शन का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा, लेकिन एकाएक उछले राजनीतिक मुद्दे ने आनी वाली सर्दी से पहले कांग्रेस को चार्ज जरूर कर दिया।

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