सैकड़ों साल पुराना है पुरोला में पांच पांडो की चौरी व थाती माता का इतिहास*
रिपोर्टर-गजेंद्र सिंह चौहान।
पुरोला, उत्तरकाशी
पुरोला में पांच पांडवों की चोरी व थाती माता का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है, जितने पुराने पुरोला के गांव हैं उतने ही पुराने हैं यहां की छाती माता और यहां के पांडवों की चोरी । यहां के हर गांव में पांडवों की चोरी है और हर गांव में थाती माता है जो कि गांव का वास्तु होता है, जिसका की पूजन समय समय पर होता है ।
आज पुरोला गांव में नवनिर्मित पांडवों की चोरी का शुद्धीकरण किया गया इस अवसर पर गांव के सभी जन सामान्य उपस्थित रहे व पांडवों ने ओतार दिया, वयोवृद्ध पंडित रामेश्वर प्रसाद नोटियाल ने बताया कि पांडव अवतरित होते हैं , उन्होंने कहा की पत्रकार व बुद्धिजीवियों से विनती है कि वह जब भी पांडवों के बारे में लिखते हैं या दृश्य फिल्माते तो पांडो औतार को नृत्य न कहे , उन्होंने कहा कि औतार का मतलब होता है अवतरित होना । जब भी पांच पांडव की पूजा या श्राद दिया किया जाता है तब तब पांडव व्यक्तियों में अवतरित होते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा मे पश्वा कहते हैं ।
*क्या है चोरी का महात्म्य*
चोरी एक चबूतरा नामा स्थान होता है जो गांव के लगभग मध्य में होता है , इस स्थान को गांव का सबसे ज्यादा पवित्र स्थान माना जाता है, गांव के लोग कोई भी कार्य करते हैं तो सबसे पहले इसी स्थान की पूजा करते हैं । जब कोई लड़की विवाह करके विदा होती है तो डोली में बैठने से पहले ओ अपने दूल्हे के साथ पांडव की चोरी की पूजा करती है व आशीर्वाद लेकर डोली में बैठकर ससुराल जाती है ।
बाइट : पण्डित रामेश्वर प्रसाद नोटियाल
बाइट : पवन नोटियाल जिलामंत्री बीजेपी उत्तरकाशी
बाइट:- पण्डित हरिकृष्ण उनियाल थाती पुजारी पुरोला व यमुनाघाटी


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