SC/ST एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मोदी सरकार के कानून को रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने आज एससी एसटी एक्ट को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर फैसला देते हुए मोदी सरकार के द्वारा SC/ST में किये गए संसोधन को बरकरार रखा ।

 सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए एससी एसटी एक्ट के सभी प्रावधानों को बरकरार रखा, सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले से यह साफ हो गया है कि एससी एसटी एक्ट के तहत बिना जांच के गिरफ्तारी हो सकेगी ओर एफ आई आर दर्ज करने से पहले किसी भी हायर अथॉरिटी की परमिशन की जरूरत नहीं होगी ।
 सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करने के लिए कोई भी व्यक्ति कोर्ट की शरण में जा सकता है और अगर कोर्ट को लगता है कि आरोप गलत है तो f.i.r. निरस्त हो सकती हैं ।

 ज्ञात हो कि पूर्व में एससी एसटी एक्ट के बिना जांच की गिरफ्तारी के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था उसके बाद दलित संगठनों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किए थे फल स्वरूप मोदी सरकार ने 2018 में एससी एसटी एक्ट में  संसद के द्वारा कानून बनाकर इसे बरकरार रखा । सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि प्रत्येक नागरिक को अन्य नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहन देना चाहिए जजो ने फैसले में कहा की अगर प्रथम दृष्टि में एससी एसटी एक्ट के तहत कोई मामला  नहीं बनता है तो कोर्ट इसे रद्द कर सकता है ।
इससे पूर्व 20 मार्च 2018 को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी एसटी एक्ट के तहत बिना जांच की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए इस एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने से देशभर में दलित संगठनो ने विरोध प्रदर्शन किए थे जिसके बाद मोदी सरकार ने इस एससी एसटी एक्ट में संशोधन किए थे ।

 एससी एसटी एक्ट पर एक नजर

एससी एसटी के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए एक्ट लाया गया था जिसे जम्मू और कश्मीर को छोड़कर के पूरे देश में लागू किया गया था, इस एक्ट में sc-st के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने  व उनको जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए व्यवस्था की गई थी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह कानून निष्प्रभावी हो गया था । जिसके बाद दलित संगठनों ने इसका देशभर में विरोध किया था और दबाव में आकर सरकार को इस कानून में संशोधन करना पड़ा, तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई भी शिकायत मिलने पर एससी एसटी एक्ट में तुरंत मुकदमा नहीं दर्ज किया जाना चाहिए, पहले ऊंचे स्तर के अधिकारी जांच करेंगे और अगर जांच में यह पाया जाता है कि एससी एसटी एक्ट के तहत मामला बनता है तभी गिरफ्तारी होनी चाहिए ।
 सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले में प्रावधान था की डीएसपी स्तर का अधिकारी शिकायत पर जांच करेगा और 7 दिन के अंदर अपनी जांच पूरी करेगा और यह पता करेगा कि मामला झूठा है या सच्चा,  सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है और किसी भी व्यक्ति को को जमानत से बंचित नहीं किया जा सकता है, तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलते हुए मोदी सरकार ने इसमें अन्य धाराएं जोड़कर पुराने  कानून को बहाल कर दिया था । इसी बदलाव  के खिलाफ जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में थी जिनका आज फैसला आ गया और एससी एसटी एक्ट में अब बिना जांच के गिरफ्तारी हो सकेगी ।

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