कैलाश रावत, बड़ियार
पुरोला की चकाचौंध से दूर पुरोला की ही 3 ग्राम पंचायतों के 8 गांव आज भी विकास से कोसों दूर है यहां न सड़क है न टेलीफोन है ना पोस्ट ऑफिस है और ना ही कोई बैंक है । देश डिजिटल हो रहा है , डिजिटल पेमेंट हो रही है लेकिन यहां के लोगों तक ऑफलाइन में भी कुछ भी नहीं है जहां देश के कोने कोने में लोग मोबाइल फोन का प्रयोग बातचीत के लिए ही नहीं अपितु खरीदारी व देश दुनिया की खबरें जानने के लिए करते हैं वहीं यहां के लोगों के लिए मोबाइल भविष्य की वस्तु है ।
पुरोला विकासखंड के बडियार क्षेत्र के आठ गाँव सर , लेवटाडी़, डिगाडीं, किंमडार, पौंटी, गौल,छानीका व कसलौं
की कुल आवदी लगभग 4000 के करीब है ।
प्रकृति के सुंदर गोद व केदार कांठा पर्वत के तलहटी में बसे बडीयार क्षेत्र के 8 गांव, जहां प्रकृति ने इन्हे सुंदरता दी है वहीं प्रदेश व केंद्र सरकार ने बड़ियार से मुह फेर रखा है, आलम यह है कि अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी पर बैठा कर पूरे दिन भर में सरनोल पहुंचाया जा सकता है उसके बाद ही गाड़ी या अन्य साधनों से उसे बडकोट या पुरोला पहुंचाया जा सकता है, ऐसा नहीं है कि यहां सड़क बनाने के लिए प्रयास नहीं किए गए, प्रयास बहुत किए गए हैं, सड़क भी मंजूर हुई पर हमारे देश के कानून सड़क बनाने में आडे आ रहे हैं ।
सन 2016 में ग्रामीणों ने तंग आकर सड़क बनाने के लिए कुछ पेड़ों को काट डाला जिसके एवज में ग्रामीणों पर कई प्रकार के केस दर्ज हुए स्थानीय नेताओं ने भी ग्रामीणों के हक में आवाज नहीं दी और ग्रामीणों पर कई केस दर्ज हो गये ।
वर्ष 2016 में जब बडीयार क्षेत्र के तमाम ग्रामीणों पर पेड़ों को काटने के जुर्म में कई केस दर्ज हुए तब नमो न्यूज़ ने बडियार के ग्रामीणों की आवाज उठाई और नमो न्यूज़ के आवाज से राज्य सरकार ही नहीं अपितु केंद्र सरकार भी हिल गई थी, तब बातचीत के द्वारा ग्रामीणों से केस वापस लिए गए ।
आज हमें बड़ी खुशी हो रही है कि उस घटना के बाद बडियार क्षेत्र की जनता को बिजली आपूर्ति शुरू हुई और स
9 किलोमीटर करीब रोड भी बनी है ।
सड़क पोस्ट ऑफिस व बैंक के बगैर तो ग्रामीण रही ही रहे हैं लेकिन आज की लाइफ लाइन बन चुके टेलीफोन की जरूरत बडियार के लोगों को भी है जब कभी आसमान साफ होता है तो बडियार में भी टेलीफोन लग जाता है, अब बडियार के लोगों की मांग है उनके यहां टेलीफोन का टावर लगाया जाए ताकि वह कम से कम देश दुनिया में बसे हुए लोगों से संपर्क कर सकें ।
पुरोला की चकाचौंध से दूर पुरोला की ही 3 ग्राम पंचायतों के 8 गांव आज भी विकास से कोसों दूर है यहां न सड़क है न टेलीफोन है ना पोस्ट ऑफिस है और ना ही कोई बैंक है । देश डिजिटल हो रहा है , डिजिटल पेमेंट हो रही है लेकिन यहां के लोगों तक ऑफलाइन में भी कुछ भी नहीं है जहां देश के कोने कोने में लोग मोबाइल फोन का प्रयोग बातचीत के लिए ही नहीं अपितु खरीदारी व देश दुनिया की खबरें जानने के लिए करते हैं वहीं यहां के लोगों के लिए मोबाइल भविष्य की वस्तु है ।
पुरोला विकासखंड के बडियार क्षेत्र के आठ गाँव सर , लेवटाडी़, डिगाडीं, किंमडार, पौंटी, गौल,छानीका व कसलौं
की कुल आवदी लगभग 4000 के करीब है ।
प्रकृति के सुंदर गोद व केदार कांठा पर्वत के तलहटी में बसे बडीयार क्षेत्र के 8 गांव, जहां प्रकृति ने इन्हे सुंदरता दी है वहीं प्रदेश व केंद्र सरकार ने बड़ियार से मुह फेर रखा है, आलम यह है कि अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी पर बैठा कर पूरे दिन भर में सरनोल पहुंचाया जा सकता है उसके बाद ही गाड़ी या अन्य साधनों से उसे बडकोट या पुरोला पहुंचाया जा सकता है, ऐसा नहीं है कि यहां सड़क बनाने के लिए प्रयास नहीं किए गए, प्रयास बहुत किए गए हैं, सड़क भी मंजूर हुई पर हमारे देश के कानून सड़क बनाने में आडे आ रहे हैं ।
सन 2016 में ग्रामीणों ने तंग आकर सड़क बनाने के लिए कुछ पेड़ों को काट डाला जिसके एवज में ग्रामीणों पर कई प्रकार के केस दर्ज हुए स्थानीय नेताओं ने भी ग्रामीणों के हक में आवाज नहीं दी और ग्रामीणों पर कई केस दर्ज हो गये ।
वर्ष 2016 में जब बडीयार क्षेत्र के तमाम ग्रामीणों पर पेड़ों को काटने के जुर्म में कई केस दर्ज हुए तब नमो न्यूज़ ने बडियार के ग्रामीणों की आवाज उठाई और नमो न्यूज़ के आवाज से राज्य सरकार ही नहीं अपितु केंद्र सरकार भी हिल गई थी, तब बातचीत के द्वारा ग्रामीणों से केस वापस लिए गए ।
आज हमें बड़ी खुशी हो रही है कि उस घटना के बाद बडियार क्षेत्र की जनता को बिजली आपूर्ति शुरू हुई और स
9 किलोमीटर करीब रोड भी बनी है ।
सड़क पोस्ट ऑफिस व बैंक के बगैर तो ग्रामीण रही ही रहे हैं लेकिन आज की लाइफ लाइन बन चुके टेलीफोन की जरूरत बडियार के लोगों को भी है जब कभी आसमान साफ होता है तो बडियार में भी टेलीफोन लग जाता है, अब बडियार के लोगों की मांग है उनके यहां टेलीफोन का टावर लगाया जाए ताकि वह कम से कम देश दुनिया में बसे हुए लोगों से संपर्क कर सकें ।




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