पुरोला का रण; गतांक से आगे पंवारो के दम पर जीत की उम्मीद । कबर स्टोरी में आगे देखिए विधायक दुर्गेश्वर लाल के समर्थक पंवारो को कैसे देगा पूर्व विधायक राजकुमार के समर्थन में उतरा ये पंवार टक्कर । आगे पूर्व विधायक मालचंद के समर्थन में क्या है पंवारों का रुझान । आगे कांग्रेसियों की बीएल आर्या व हरिमोहन जुवांठा के प्रति क्या है राय ।

   गजेंद्र सिंह चौहान पुरोला 

 पुरोला की राजनीति हमेशा से ही जटिल रही है, आज तक के इतिहास में यहाँ से कोई भी लगातार दो बार विधायक नहीं रहा हैं। यहाँ के सत्ता विरोधी रुझानों के असर से यहां से आजतक विरले ही ही लोग पंचायतो में दुबारा या तिबारा ही चुनाव जीत पाये है।

अब बात करे आज के शीर्षक की तो उपरोक्त कथन पुरोला विधानसभा के अंतर्गत केवल पुरोला विकासखंड के संबंध में ही पढ़ा जाना चाहिए।

सर्वप्रथम बात करे विधायक दुर्गेश्वर लाल की तो बीजेपी मंडल अध्यक्ष रामचंद्र पंवार, राज्य आंदोलनकारी संघ पुरोला के अध्यक्ष राजपाल पंवार व व्यापार मंडल अध्यक्ष पुरोला अंकित पंवार वर्तमान में विधायक के सर्वाधिक करीबी लोगों में से गिने जाते है। रामचंद्र पंवार पूर्व में पूर्व विधायक एवं दर्जधारी राज्यमंत्री राजकुमार के करीबी रहे हैं। राजपाल पंवार पूर्व में पूर्व विधायक मालचंद के करीबी लोगों में शुमार रहे हैं। अंकित पंवार पूर्व में पूर्व विधायक मालचंद के करीबी रहे हैं। इन व्यक्तियों के साथ एक समानता इन्हें खास बनाती हैं, तीनो वर्तमान में अपने अपने संगठन के अध्यक्ष हैं। 

अब बात करे पूर्व विधायक एवं दर्जधारी राज्यमंत्री राजकुमार की तो उनके सर्वाधिक करीब पंवारों में शुमार पूर्व मंडल अध्यक्ष भाजपा जगनमोहन पंवार है। जगमोहन पंवार ने राजकुमार के समर्थन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी हैं।

अब बात करे पूर्व विधायक मालचंद की तो उपरोक्त पंवारो में से बीजेपी मंडल अध्यक्ष रामचंद्र पंवार को छोड़कर अन्य तीन पंवार कभी उनके खासमखास रहे हैं व शायद भविष्य में वे इसका लाभ लेने की कोशिश संभवतः करेंगे । वर्तमान में उनके साथ पूर्व ब्लॉक प्रमुख के पति गोविंद पंवार का समर्थन संभवतः कायम है, नमो न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है क्योंकि पूर्व विधायक मालचंद ने अभी तक कोई राजनीतिक रैली या कार्यक्रम नहीं किये है। पूर्व विधायक मालचंद के सर्वाधिक करीबी चेहरों में एक नाम दशरथ पंवार का है जो काफी लोकप्रिय भी है व जमीन पर कार्य करने वाले व्यक्ति हैं। पूर्व विधायक मालचंद के लिए विगत के वर्षों से समर्पित एक अन्य पंवार सौबेंद्र पंवार है जिनकी जमीनी पकड़ जगजाहिर है।

अब बात करे सभी पंवारो की विशेषताओं की तो राजपाल पंवार भाषण देने की कला में निपुण है, रामचंद्र पंवार बहुत पहले से भाजपा संगठन चला रहे समूह का हिस्सा रहे है। अंकित पंवार हंसमुख स्वभाव के धनी होने के साथ दिनभर चलते हुए मीटिंग करने में निपुण है।

बात करे जगमोहन पंवार की तो वे एक कुशल संगठन कर्ता के साथ नए लोगों से संवाद करने में निपुण है।

गोविन्द पंवार भाषण तो नहीं देते हैं अपितु काम करने में विश्वास रखते हैं, पूर्व में पत्नी के प्रमुख होने के कारण उन्होंने हर गांव में कैडर खड़ा कर रखा है, जिसका फायदा उन्हें हर चुनाव में मिलता है।

दशरथ पंवार विगत 25 वर्षों से राजनीति में सक्रिय है व जन जन तक उनकी पहुंच है व किसे कैसे राजी करना है ये उन्हें बखूबी आता है। बात करे सौबेंद्र पंवार की तो वे जमीन पर राजनीतिक मुद्दों में बहस करने में निपुण हैं व लामबंदी करने का विशेष गुण रखते हैं।

उपरोक्त कथन में पंवारो की वर्णित विशेषताओं के कारण बीजेपी के तीनों दिग्गज पंवारों को अपने अपने पक्ष में लामबंदी कर रहे हैं।


पिछले अंक में अभी तक 

कांग्रेस के भीतर एक विकल्प समी बोरियाण का भी है, पिछले दिनों उन्होंने प्रीतम सिंह के साथ मंच साझा कर इस बात का संकेत भी दे दिया है। यहां ये भी बता दूं कि समी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है व सोशल मीडिया के सर्वे में वे सबसे आगे हैं।


कबर स्टोरी में अभी तक 


पिछले अंक की कबर स्टोरी:-

पुरोला की राजनीतिक बिसात में आजकल कड़ाके की ठंड के बीच भारी गर्माहट है। विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सरगर्मी तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार चुपचाप जन सम्पर्क कर खुद को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं तो वहीं अधिकांश कार्यकर्ता बाहरी उम्मीदवार न उतारने के पक्ष में हैं।


हमेशा की तरह भाजपा के भीतर भारी उठापठक का माहौल है। पार्टी के वर्तमान विधायक दुर्गेश्वर लाल लगातार जन सम्पर्क कर खुद को मजबूत करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं पूर्व विधायक एवं दर्जधारी राज्यमंत्री राजकुमार जन संवाद कार्यक्रम कर खुद को मज़बूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। वहीं पूर्व विधायक मालचंद ने कुछ दिन शांत रहने के बाद अचानक अपने आवास पर जन मिलन कार्यक्रम कर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खुद को मज़बूत दिखने के लिए पूरी ताकत लगाई है।

भाजपा के तीनों दिग्गज चेहरों विधायक दुर्गेश्वर लाल, दर्जधारी राज्यमंत्री एवं पूर्व विधायक राजकुमार व पूर्व विधायक मालचंद में से पार्टी किस पर विश्वास करती है, ये तो भविष्य ही बताएगा ।


 अभी तक के रुझानों में पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल का कोई स्पष्ट प्रतिद्वंद्वी सामने नहीं आया है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पूर्व के दोनों विधायकों का बीजेपी में होना है। पिछली विधानसभा में बीजेपी के टिकट पर दो बार के विधायक रहे मालचंद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा किंतु बीजेपी प्रत्याशी विधायक दुर्गेश्वर लाल चुनाव जीतकर विधायक बने । विधानसभा चुनावों के बाद वे दुबारा बीजेपी में शामिल हो गए व अब बीजेपी से टिकट की दावेदारी करेंगे । वहीं पूर्व विधायक राजकुमार को सरकार ने दर्जाधारी राज्यमंत्री बनाया है व वो बीजेपी के टिकट की दावेदारी करेंगे।

कयास ये लगाएं जा रहे हैं 

आम जनता के बीच कयास यही है कि उपरोक्त तीनों में से जिसका भी बीजेपी से टिकट कटेगा अन्य दो में से किसी एक पर कांग्रेस विश्वास कर टिकट दे सकती हैं।

अब सवाल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता क्या चाहते है? अधिकांश कार्यकर्ता कांग्रेस का विधायक अगली विधानसभा में हर कीमत पर देखना चाहते है। उपरोक्त तीनों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अच्छे संबंध है व टिकट मिलने की स्थिति में उन्हें इनके साथ काम करने में कोई दिक्कत सम्भवतः नहीं होगी ।

रवांई जन एकता ने पूर्व अधिकारी बीएल आर्या को प्रत्याशी घोषित कर उनके पक्ष में लामबंदी शुरू कर दी है। खबर ये भी है कि कांग्रेस के स्थानीय से लेकर प्रदेश व केंद्र के नेताओं से उनकी भेंट हो भी चुकी हैं।

आगे की पटकथा 

कांग्रेस के भीतर ये है दावेदार 

कांग्रेस के भीतर नगर पालिका अध्यक्ष बिहारी लाल शाह एक सशक्त उम्मीदवार बनकर उभर रहे है। कांग्रेस हलकों में उनकी उम्मीदवारी के प्रति एक राय सी बनती प्रतीत हो रही है। किन्तु सुनने में ये भी आ रहा हैं कि कांग्रेस संगठन के लोग भाजपा के तीन चेहरों दुग्धेश्वर लाल, राजकुमार व मालचंद में से एक के साथ नजदीकी संबंध बना रहे है व इन तीनों में से किसी एक पर दावं लगाने के पक्ष में हैं।

कांग्रेस के भीतर मोहन लाल बुराटा भी एक सशक्त दावेदार हैं । तीसरा विकल्प रवांई जन एकता मंच के घोषित प्रत्याशी बीएल आर्या है, बीएल आर्या भी कांग्रेस के राज्य स्तरीय व केंद्रीय नेताओं के संपर्क में है। कांग्रेस के भीतर एक विकल्प समी बोरियाण का भी है, पिछले दिनों उन्होंने प्रीतम सिंह के साथ मंच साझा कर इस बात का संकेत भी दे दिया है। यहां ये भी बता दूं कि समी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है व सोशल मीडिया के सर्वे में वे सबसे आगे हैं।

भाजपा के तीन चेहरे जो गलती से ही मंच साझा करते हैं 

अब बात करे भाजपा के तीनों चेहरों विधायक दुर्गेश्वर लाल, पूर्व विधायक एवं दर्जधारी राज्यमंत्री राजकुमार व पूर्व विधायक मालचंद की तो ये तीनों आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर कमर कसे हुए है। साथ ही तीनो एक दूसरे के प्रति सदभाव नहीं प्रदसित करते हैं। टोना ने विगत चार वर्षों में मुश्किल से दो बार मंच साझा किया है व वहां भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

कुल मिलाकर तीनो विधानसभा चुनाव लड़ने के प्रति प्रतिबद्ध हैं व एन बक्त पर कोई भी कांग्रेस को या तो समर्थन कर सकता हैं या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकता है।


कबर स्टोरी का अगला भाग अपडेट हो रहा हैं --------

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