ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा कवच: 40 देशों से कच्चा तेल खरीद, 70 दिन का भंडार… युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रणनीति । जमीन के भीतर विशाल चट्टानी गुफाओं में रखा जाता हैं आपात स्थिति के लिए तेल । भारत विश्व का तीसरा बड़ा कच्चे तेल का आयातक । जरूरत का सिर्फ़ 15 प्रतिशत का ही हम करते हैं खुद उत्पादन।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा कवच: 40 देशों से कच्चा तेल खरीद, 70 दिन का भंडार… युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रणनीति

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर चर्चा में है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, लेकिन संभावित युद्ध या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय रणनीति तैयार कर रखी है।


40 देशों से तेल खरीद रहा भारत

पहले भारत मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भर था, पर अब नीति बदल दी गई है। वर्तमान में भारत रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, कुवैत और अफ्रीकी देशों समेत करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है।

रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जबकि इराक और सऊदी अरब पारंपरिक आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई देशों से खरीद का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक क्षेत्र में युद्ध या प्रतिबंध लगने पर देश की सप्लाई न रुके।

कहां रखा जाता है आपातकालीन तेल भंडार

भारत ने आपातकालीन स्थिति के लिए भूमिगत “स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR)” तैयार किया है। यह भंडार चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं में रखा जाता है, ताकि युद्ध या हमले में भी सुरक्षित रहे।

मुख्य भंडारण केंद्र:

विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)

मंगलूरु (कर्नाटक)

पाडुर (कर्नाटक)

इन भंडारों में लगभग 5.3 मिलियन टन कच्चा तेल रखा जा सकता है, जिससे देश करीब 9-10 दिन चल सकता है। वहीं तेल कंपनियों के व्यावसायिक स्टॉक जोड़ने पर भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 70 दिन की ऊर्जा सुरक्षा उपलब्ध मानी जाती है।

खुद कितना तेल पैदा करता है भारत

भारत प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन बहुत सीमित है। देश अपनी जरूरत का केवल 15 प्रतिशत के आसपास ही तेल स्वयं निकाल पाता है।

मुख्य उत्पादन क्षेत्र:

मुंबई हाई (महाराष्ट्र तट)

असम के तेल क्षेत्र

कृष्णा-गोदावरी बेसिन

राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र

युद्ध की स्थिति में क्या है रणनीति

सरकार की ऊर्जा सुरक्षा नीति कई स्तरों पर काम करती है—

1. बहु-स्रोत आयात: किसी एक देश पर निर्भरता खत्म।

2. रणनीतिक भंडार: आपात स्थिति में सरकारी तेल रिजर्व का उपयोग।

3. नौसेना सुरक्षा: होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा।

4. मल्टी-क्रूड रिफाइनरी: किसी भी देश के तेल को प्रोसेस करने की क्षमता।

5. वैकल्पिक ईंधन: एथेनॉल मिश्रण, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा।

6. आपातकालीन नियंत्रण: गंभीर स्थिति में ईंधन की सीमित आपूर्ति व प्राथमिकता रक्षा और कृषि को।

क्यों अहम है ऊर्जा सुरक्षा

भारत तेल-समृद्ध देश नहीं है, इसलिए अर्थव्यवस्था, परिवहन, खेती और उद्योग सब कच्चे तेल पर निर्भर हैं। किसी बड़े युद्ध या आपूर्ति रुकने की स्थिति में सबसे पहला असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अलग-अलग देशों से आयात, रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर देकर भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की कोशिश की है।

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