Purola का रण: दुर्गेश लाल बनाम मालचंद, भाजपा में कौन किसके साथ?
कार्यकर्ता किसकी लगाएंगे दोफारी और किसका हांकेंगे रथ?
उत्तराखंड की Purola विधानसभा का राजनीतिक इतिहास हमेशा दिलचस्प रहा है। यहां अब तक कोई भी नेता लगातार दो बार चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच पाया। यही कारण है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है और सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वर्तमान विधायक दुर्गेश लाल इतिहास बदल पाएंगे, या पूर्व विधायक मालचंद तीसरी बार विधानसभा पहुंचने में सफल होंगे?
पूर्व विधायक मालचंद पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। बाद में टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और मामूली अंतर से हार गए। इसके बाद भाजपा ने पुनः उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा विधायक बने। वर्ष 2017 में भाजपा से टिकट मिलने के बावजूद पार्टी में असंतोष के चलते कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे राजकुमार चुनाव जीत गए। हालांकि वर्ष 2022 के चुनाव से पहले राजकुमार ने कांग्रेस छोड़कर पुनः भाजपा का दामन थाम लिया।
वर्ष 2022 के चुनाव में मुकाबला भाजपा उम्मीदवार दुर्गेश लाल और कांग्रेस उम्मीदवार मालचंद के बीच हुआ, जिसमें दुर्गेश लाल ने जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उन्होंने एक नया राजनीतिक अध्याय भी लिखा। वे Purola के ऐसे पहले विधायक बने जो सत्ताधारी दल से विधायक चुने गए। इससे पहले यहां के सभी विधायक विपक्ष की राजनीति का हिस्सा रहे।
चुनाव हारने के बाद मालचंद ने भी पुनः भाजपा में वापसी कर ली। अब स्थिति यह है कि भाजपा में तीन बड़े चेहरे—दुर्गेश लाल, मालचंद और पूर्व विधायक राजकुमार—संभावित टिकट दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर समीकरण लगातार बदलते दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो वर्तमान जिला और मंडल स्तर के अधिकांश पदाधिकारी दुर्गेश लाल के पक्ष में नजर आते हैं। वहीं पुराने और पूर्व पदाधिकारियों का झुकाव मालचंद की ओर माना जा रहा है। दूसरी ओर वर्षों से पार्टी का झंडा उठाने वाले कई पुराने कार्यकर्ता लगातार उपेक्षा की भावना से जूझ रहे हैं। ऐसे कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी जिसे टिकट देगी, वे उसी के साथ खड़े रहेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुर्गेश लाल पुरोला की राजनीति का पुराना मिथक तोड़कर लगातार दूसरी बार विधायक बनेंगे, या मालचंद तीसरी बार विधानसभा पहुंचने में सफल होंगे? वहीं यदि पार्टी पूर्व विधायक एवं राज्यमंत्री राजकुमार पर दांव खेलती है, तो दुर्गेश लाल और मालचंद की रणनीति क्या होगी? क्या दोनों पार्टी के भीतर रहकर काम करेंगे या फिर नए राजनीतिक समीकरण तैयार होंगे?
उधर कांग्रेस भी संभावित उम्मीदवारों की तलाश में जुटी हुई है। पार्टी के पास बीएल आर्या, बिहारी लाल शाह, प्रकाश चंद, हरिमोहन जुवांठा, शमी बोरियान और सचिन कुमार जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है।
अस्वीकरण
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