गजेन्द्र सिंह चौहान , पुरोला
पुरोला विधानसभा में बीजेपी को एक के बाद एक झटके लगने तय है । कुछ दिनों पूर्व दुर्गेश लाल ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी, उन्होंने बीजेपी से मोहभंग होने का प्रमुख कारण मुख्यमंत्री द्वारा मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज व सीएचसी का उच्चीकरण न करना बताया था ।
वही मुख्यमंत्री ने पुरोला विधानसभा भ्रमण के दौरान नौगांव में जनसभा को संबोधित करते हुए छोटी मोटी योजनाओं की घोषणाओं की झड़ी लगा दी थी । जिससे जनता में व्यापक नाराजगी है, जनता का कहना है कि इस तरह की योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री की क्या आवश्यकता थी ये तो ग्राम पंचायत की खुली बैठक में पासकर नरेगा के तहत कराई जा सकती थी ।
सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक पुरोला विधानसभा के एक ओर कद्दावर नेता मुख्यमंत्री द्वारा छफुटियो की घोषणाओं से आहत आकर कांग्रेस में आज सामिल हो सकते हैं ।
हरीश रावत उक्त नेता से बताये जा रहे हैं नाराज
खबर ये भी है कि उक्त नेता से हरीश रावत नाराज बताये जा रहे है, हरीश रावत की नाराजगी की वजह से उक्त नेता के कांग्रेस में आने में विलम्ब भी हो सकता है ।
डिस्क्लेमर: खबर की आधिकारिक पुष्टि न तो कांग्रेस द्वारा की गई है ओर न ही किसी कद्दावर नेता द्वारा , न ही स्थानीय कांग्रेस व भाजपा पदाधिकारियो ने इस संबंध में कोई बयान दिया है । ये खबर सूत्रों के हवाले से आ रही है जो दिन चढ़ने के साथ पुष्ट या अपुष्ट हो सकती है ।
जनता की नजर में मालचंद व राजकुमार में कौन बेहतर जनप्रतिनिधि
गजेन्द्र सिंह चौहान पुरोला, 4 दिसम्बर 2021
विधानसभा चुनाव की रणवेरी लगभग बजने को हैं ओर इस रणवेरी बजने से पूर्व पुरोला में शांति छाई हुई है । अमूमन पुरोला में राजनीतिक चर्चा होना आम बात है पर वर्तमान में कही भी कोई चर्चा नही है ।
राजनीतिक चर्चाओं में कमी की वजह
पुरोला की राजनीति विगत कुछ वर्षों से मालचंद व राजकुमार के बीच सिमटी हुई थी , 2012 व 2017 के चुनावों से पूर्व दोनों व्यक्तियों ने पूरे पांच वर्ष सक्रिय रहकर जनता के बीच हर अवसर पर अपनी उपस्थिति दिखाई । मगर 2012 के चुनाव से येन पहले बीजेपी ने राजकुमार कुमार को टिकट देने से मनाकर मालचंद को टिकट दे दिया । फलस्वरूप राजकुमार ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया व मालचंद को सीधी टक्कर दी मगर परिणाम मालचंद के पक्ष में रहा ।
हार के बावजूद राजकुमार जनता के बीच लगातार सक्रिय रहे
2012 के चुनाव में हारने से राजकुमार के इरादों ओर भी पक्के हो गये ओर वे तत्कालीन विधायक के नाराज चल रहे समर्थकों को लगातार साधते रहे । फलस्वरूप वे पुरोला विधानसभा में मजबूत होने लगे व जनता मालचंद से जादा नाराज मालचंद की निधि पर कुंडली मारे लोगो से हो गई । फलस्वरूप जनता ने मालचंद की निधि से अमीर बने लोगो को सबक सिखाने की ठानी । लेकिन चुनाव से येन पहले एक बार फिर राजकुमार का टिकट कट गया व बीजेपी ने एक बार मालचंद पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया लेकिन मजबूत इरादों वाले राजकुमार ने हताश हुए बिना कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत तो लिया पर कांग्रेस में अपने को फिट नही पा रहे थे ।
एलआईसी जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी
फलस्वरूप राजकुमार जनता व कांग्रेस पार्टी से दूर होते गए । इस भूल को सुधारने के लिए उन्होंने दिल्ली में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली । बीजेपी में आते ही राजकुमार अपनी पुरानी फोम में आये व डामटा से पुरोला तक एक रैली निकाल कर अपनी ताकत का एहसास करा गये ।
इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री का पुरोला विधानसभा का भ्रमण कार्यक्रम बनाया व नौगांव इंटर कॉलेज में मुख्यमंत्री की जनसभा कराई व इसी जनसभा में में मुख्यमंत्री ने कुछ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ सड़को के अनुरक्षण व छफुटियो के अनुरक्षण कराने की घोषणा की ।
कुछ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा कराये जाने से जनता में रोष व्याप्त हो गया । कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि उक्त छफुटी का अनुरक्षण का प्रस्ताव मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत की खुली बैठक में भी पास कराया जा सकता था ।
राजकुमार ने गलतियों से सबक सीखते हुए दुबारा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बनाया व इसबार मुख्यमंत्री की गून्दियाटगाँव में आना था पर किसी वजह से कार्यक्रम अभी तक बन नही पाया । विधायक राजकुमार ने कहा कि जनता का हित सर्वोपरि है व इन्हीं हितों के निहितार्थ मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बनाया जा रहा है । राजकुमार समर्थकों का कहना है कि गून्दियाटगाँव में मुख्यमंत्री यहां की जनता की इच्छा के अनुरूप मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, सीएचसी पुरोला का उच्चीकरण, सीएचसी नौगांव के उच्चीकरण में से कोई न कोई घोषणा जरूर करेंगे ।
2017 के चुनाव में हार के बाद मालचंद ने राजनीतिक गतिविधियों से अधिकतर दूरी बनाई रखी व कभी कभार ही पार्टी के कार्यक्रमो में अपनी उपस्थिति दिखाते रहे । लेकिन विधायक बनने के बावजूद कांग्रेस में असहज राजकुमार की वजह से मालचंद के प्रति जनता में लगाव जरूर बढ़ने लगा ।
बावजूद खबर लिखे जाने तक राजकुमार व मालचंद ने इस माह में अभीतक किसी भी प्रकार का राजनीतिक कार्यक्रम नही किया है । साथ ही वर्तमान में दोनों ही बीजेपी के सदस्य हैं । यदा कदा मालचंद के कांग्रेस में जाने की चर्चा जरूर होती पर सारी चर्चा अफवाह सिद्ध हुई है ।
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