पुरोला, केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही पुरोला का सर्वाधिक महत्वपूर्ण धाम शिरगुल महाराज की तपस्थली सरूका धाम के कपाट भी बंद हो गए ।
महाराज धाम के पुजारियों में एक भगवान शर्मा ने बताया कि सरूका धाम के कपाट बर्फवारी के बीच शीतकाल के लिये बन्द हो गए हैं ।
5 किमी खड़ी चढाई चढ़कर पहुंचा जाता है सरूका धाम
सरूका धाम तक पहुंचने के लिए पुरोला से कूफारा तक सड़क मार्ग है उससे आगे सरूका धाम तक जंगली मार्ग से खड़ी चढ़ाई दार मार्ग है । मार्ग की दूरी लगभग 5 किमी है ।
मन्दिर जनपद उत्तरकाशी व देहरादून की सीमा पर स्तिथ हैं ।घने जंगलों की बीच स्तिथ मन्दिर को आजतक आग से कोई नुकसान नही पहुंचा
पुजारी भगवान शर्मा बताते हैं कि मंदिर घने जंगल मे होने के बावजूद आजतक आग से अछूता रहा है , यही नही मन्दिर घने पेड़ो के बीच है जो कि आंधी तूफान में गिरते रहते हैं पर आजतक मन्दिर के ऊपर कभी भी कोई पेड़ नही गिरा है ।
एक ओखली से मिलता है सभी श्रद्धालुओं को पानी
प्रतिवर्ष बैसाख के महीने में लगने वाले मेले में हजारों श्रद्धालु पहुँचते है, मन्दिर के आसपास पानी के श्रोत नही है । सभी श्रद्धालुओं को मन्दिर के साथ स्तिथ ओखली से माली ( पुजारी) पानी देते हैं, जिससे श्रद्धालु खाना व प्रसाद बनाते हैं । ये शिरगुल महाराज की माया है कि चाहे कितने भी श्रद्धालु पहुंचे ओखली से सबको पानी मिलता है ।
इस ओखली का पानी न कम होता है ओर न ही कभी ओखली से बाहर आता है ।



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