विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से कहीं छात्र आवेदन करने से रह रहे हैं वंचित
देहरादून के कालसी तहसील, ब्लाक के बुरे हाल देखने को मिलते हैं वहीं सेवायोजन कार्यालय भी इनसे लापरवाही में पीछे नहीं रहता ।
सेवायोजन कार्यालय के आला अधिकारीयों के द्वारा चलती आ रही लापरवाही के कारण कही छात्र रोजगार के अवसर ही गंवा बैठे हैं , सेवायोजन कार्यालय द्वारा समय पर एम्प्लॉयमेंट न बनने पर छात्र छात्राएं फार्म भरने से कही बार वंचित रह चुके हैं । कहीं बार सेवायोजन कार्यालय में वार्तालाप कर चुके हैं और छात्रों ने रोष जताया है परन्तु व्यवस्था ठस के मस नहीं हुई ।
सेवायोजन कार्यालय की लापरवाही के चपेट में आए छात्र दिवान नोटियाल का कहना है कि सितंबर माह 2019 में आवेदन कर चुका हूं 20 बार कार्यलय के चक्कर काट चुका हूं परन्तु आज तक निराशा हाथ लगी है कही रोजगार के लिए आवेदन करने से वंचित रह चुका हूं । कहीं बार तो कार्यलय जाने पर अधिकार ही मौके पर नहीं मिले । कार्यलय में तीखी नोकझोंक होने के बाद सेवायोजन कार्यालय से एम्प्लॉयमेंट सार्टिफिकेट तो थमा दिया है परन्तु अधिकारियों का रोना फिर शुरू होता है अब उस पर सेवायोजन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है फोन में वार्तालाप होने के बाद विकासनगर बुलाया जाता है परन्तु विकासनगर पहुंचते ही फिर टालमटोल किया जाता है । शायद इन अधिकारियों को अपने सुख सुविधा के लिए तैनात किए गए हैं जनता के लिए नहीं ।
देहरादून के कालसी तहसील, ब्लाक के बुरे हाल देखने को मिलते हैं वहीं सेवायोजन कार्यालय भी इनसे लापरवाही में पीछे नहीं रहता ।
सेवायोजन कार्यालय के आला अधिकारीयों के द्वारा चलती आ रही लापरवाही के कारण कही छात्र रोजगार के अवसर ही गंवा बैठे हैं , सेवायोजन कार्यालय द्वारा समय पर एम्प्लॉयमेंट न बनने पर छात्र छात्राएं फार्म भरने से कही बार वंचित रह चुके हैं । कहीं बार सेवायोजन कार्यालय में वार्तालाप कर चुके हैं और छात्रों ने रोष जताया है परन्तु व्यवस्था ठस के मस नहीं हुई ।
सेवायोजन कार्यालय की लापरवाही के चपेट में आए छात्र दिवान नोटियाल का कहना है कि सितंबर माह 2019 में आवेदन कर चुका हूं 20 बार कार्यलय के चक्कर काट चुका हूं परन्तु आज तक निराशा हाथ लगी है कही रोजगार के लिए आवेदन करने से वंचित रह चुका हूं । कहीं बार तो कार्यलय जाने पर अधिकार ही मौके पर नहीं मिले । कार्यलय में तीखी नोकझोंक होने के बाद सेवायोजन कार्यालय से एम्प्लॉयमेंट सार्टिफिकेट तो थमा दिया है परन्तु अधिकारियों का रोना फिर शुरू होता है अब उस पर सेवायोजन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है फोन में वार्तालाप होने के बाद विकासनगर बुलाया जाता है परन्तु विकासनगर पहुंचते ही फिर टालमटोल किया जाता है । शायद इन अधिकारियों को अपने सुख सुविधा के लिए तैनात किए गए हैं जनता के लिए नहीं ।

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