गजेंद्र सिंह चौहान
नगर पालिका पुरोला को अतीत में अरबों रूपये का बजट सरकार द्वारा आवंटित किया गया है। आवंटित बजट की धनराशि में से 80 प्रतिशत का दुरुपयोग यहां के हुक्मरानों ने किया है। आवंटित बजट में से नगर के कुछ रास्ते जिनपर प्रधानों के समय में ही पीसीसी कार्य हो रखा था उन्हीं रास्तों को नया बताकर करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार किया गया है। यही नहीं भ्रष्टाचार की हद तब हुई जब विगत के वर्षों में एक ही रास्ते को अलग अलग नामों से अनेक बार बनाया गया है।
यही नहीं नगर के प्रवेश द्वार यानी कि तहसील गेट के निकट निर्माणधीन पार्किंग से निकले करोड़ों रुपयों की खनिज संपदा को पूरी तरह से गबन कर बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया गया। रही सही कसर विलोपित योजनाओं को लेकर ठेकेदारों को नोटिस देकर उन्हें करोड़ों रुपयों के कर्ज जाल में फंसाया गया है।
करोड़ों के वारे न्यारे करने के बावजूद नगर वासियों की मूलभूत सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कूड़ा निस्तारण के नाम पर करोड़ों रुपयों के वारे न्यारे किए गए मगर नगर वासियों को मिला बीमारियों को आमंत्रण देने वाला कूड़ा घर । उक्त कूड़ाघर के हालात ऐसे है कि वहां से पैदल गुजरना मौत को दावत देना है, जिसकी वजह वहां से निकलनी वाली बदबू , आवारा कुत्ते व बंदर ।
नगर के सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण ऐसी जगह किया गया जहां के बारे में लोगों को पता ही नहीं है, ओर जिन शौचालयों के बारे में पता है वहां आदमी जायेगा स्वस्थ होकर ओर लौटेगा बीमार होकर । नगर के एक एक सार्वजनिक शौचालयों का विगत वर्षों में लगभग पांच पांच बार पुनर्निर्माण किया गया लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं किया गया।
मोरी बैंड अर्थात छाड़ा खड्ड स्थित सार्वजनिक शौचालय के लिए बना सेफ्टिक टैंक विगत पांच वर्षों से टूटा हुआ है, किंतु उसकी मरम्मत करने की अपेक्षा शौचालयों का पुनर्निर्माण कर दिया जाता है। उक्त टैंक में जब कोई वाहन या व्यक्ति गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा तब जाकर घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जाएंगे।
पुरोला के बस स्टेशन पर जाओगे तो वहां गंदगी का अंबार है, अगर आपको नौगांव की ओर जाने के लिए बस में बैठना पड़े तो आपको उक्त गंदगी से तो दो चार होना पड़ेगा ही साथ ही में अगर आप महिला हैं तो आपके सामने खुल्ला पुरुष शौचालय आपके लिए कितनी बड़ी शर्मिंदगी की वजह बन जाता है ये आप खुद सोच सकते है।
विगत के वर्षों में पुरोला नगर पालिका द्वारा कथित विकास की गंगा बहाई गई , धरातल पर जितना विकास हुआ उसका 8 गुना विकास कागजों में हुआ। लेकिन जो जनता की मूलभूत सुविधा थी स्वच्छता उस पर सिर्फ स्वच्छ पुरोला के नारे लगाए गए लेकिन किया कुछ भी नहीं ।
अब बात करते हैं नगर की पेयजल समस्या, जिस पर हम शुरू में ही चर्चा कर चुके हैं के समाधान की तो मेरा स्पष्ट मत है कि नगर पालिका परिसर में 20 लाख लीटर क्षमता के टैंक बनाकर नगर वासियों को दिन के 12 घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।

0 टिप्पणियाँ