डिलीट करने से पहले बड़ा खुलासा । वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों में घिरे लोकप्रिय नेता की हो सकती हैं भाजपा में धमाकेदार एंट्री । सहयोगियों को एक के बाद एक मिल रहे करोड़ों के ठेकों से गदगद है उक्त नेता। भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ तैयार हो रहे गुप्त ठगबंधन से जल्द उठ सकता हैं पर्दा । A popular leader surrounded by allegations of financial irregularities may make a explosive entry in BJP. The said leader is proud of the contracts worth crores that his associates are getting one after the other. The secret conspiracy being prepared against the BJP District President may be exposed soon.

 डिलीट करने से पहले आप समस्त पाठकों के मनोरंजन के दृष्टिगत आज की ये आवरण कथा लिख रहा हूं। कथा का मौजू ये है कि वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों से घिरे एक लोकप्रिय नेता जल्दी ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते है। भाजपा जिलाध्यक्ष की पार्टी के भीतर बढ़ती स्वीकारती को लेकर एक वर्ग  पार्टी के अंदर एक ठगबंधन बनाने की कोशिश लंबे समय से कर रहा है लेकिन इसमें उन्हें सफलता हाथ नहीं लग पा रही हैं। अब भाजपा के बारे में जानकारी रखने वालों के माध्यम से कुछ बाते बाहर निकलनी शुरू हुई है। जानकारों का मानना है कि वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों में घिरे एक नेता की जल्दी ही भाजपा में एंट्री होने जा रही है। जानकारों का मानना ये भी है कि उक्त नेता ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से पहले पूरी तैयारी के साथ अपने मोबाइल से पिछले राजनीतिक शख्सियतों की फोटो डिलीट करनी शुरू कर दी है व शुद्ध अंतःकरण के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण करना चाह रहे हैं ।


अब सवाल ये उठता है कि उक्त नेता को भाजपा में कौन ओर क्यों लाना चाहता है। तो उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि कोई बड़ा नेता हैं जो उक्त नेता को भाजपा में लाना चाह रहे है । अब सवाल ये है कि उक्त नेता को भाजपा में लाने का क्या फायदा है। इसका जवाब सीधा है कि उक्त नेता की जनता में बहुत अच्छी पकड़ है, जिसका किसी भी चुनाव में सीधा फायदा भाजपा को होगा । यहां ये भी स्पष्ट है कि जनता के बीच उक्त नेता की लोकप्रियता की वजह विकास के प्रति उनकी सकारात्मक सोच है। छोटे शहर को महानगरों से भी बेहतर बनाने के उनके विजन की जनता सदैव खुले दिल से प्रशंसा करती रही है। एक ये भी वजह है कि आसन निकाय चुनावों के मद्देनजर भाजपा का बड़ा नेता उनकी पार्टी में एंट्री करवाना चाह रहा है।

एक तरफ उक्त नेता के आने से भाजपा को सीधा फायदा हो सकता है व दूसरी कंडीशन में यदि उक्त नेता को भाजपा निकाय चुनाव लड़वाती है तो भी भाजपा का ही फायदा है।

अब सवाल ये है कि उक्त नेता के भाजपा में आने से एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी व दूसरी तरफ निकाय चुनाव में भाजपा की जीत पक्की होगी । भाजपा में आने पर उक्त नेता पर लगे वित्तीय अनियमिताओं के आरोप तो गंगा स्नान करेंगे ही साथ ही भाजपा जिलाध्यक्ष  के खिलाफ एक ठगबंधन भी तैयार हो सकता हैं।

अब उक्त नेता अगर भाजपा में आते है तो सबसे बड़ा सवाल उन पड़ोसियों का क्या होगा जो निकटतम संबंधी होने के बावजूद एक दूसरे को मात देकर भाजपा के टिकट पर नगर निकाय का अध्यक्ष बनना चाह रहे है। खैर राजनीति की मजबूरी समझो या मौके की नजागत उनमें से किसी एक के लिए कांग्रेस के दरवाजे शायद खुल रहे हो।

अब ये भी जान लेते है कि वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों से घिरे लोकप्रिय नेता की भाजपा में होने वाली एंट्री से पूर्व  क्या हुआ । उक्त लोकप्रिय किंतु वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों से घिरे नेता के सहयोगियों को विगत दो वर्षों में अरबों रूपयों के ठेके विभिन्न विभागों के माध्यम से आवंटित हुए हैं । सहयोगियों को मिल रहे अरबों के ठेके से भी स्पष्ट है कि उक्त नेता जनता में ही लोकप्रिय नहीं है अपितु वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों के बावजूद सरकार व शासन में बड़ी पकड़ भी रखता है। 

नदी नालों में चल रहे करोड़ों रुपयों के ठेके हो या नई सड़कों के निर्माण के ठेके हर कही उक्त लोकप्रिय किंतु वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों से घिरे नेता के सहयोगियों का दबदबा है। यहां स्पष्ट हैं कि संसाधनों पर उक्त नेता के सहयोगियों का कब्जा यों ही नहीं हुए हैं, इसके पीछे एक बहुत बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत कार्य किया गया। उक्त नेता लोकप्रिय ही नहीं है अपितु एक बड़े रणनीतिकार भी है , जिसकी बानगी है कि भाजपा के टिकट पर उनके सहयोगी विगत वर्षों में चुनाव ही नहीं जीते हैं अपितु सरकार द्वारा विभिन्न पदों पर नामित भी किए जा चुके हैं। 

उपरोक्त कथनों की पुष्टि विगत दो वर्षों में उक्त लोकप्रिय किंतु वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों में घिरे नेता के सहयोगियों को मिले अरबों रूपयों के ठेके खुद पुष्टि कर रहे है। यहां ये भी स्पष्ट है कि अगर उक्त लोकप्रिय किंतु वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों से घिरे नेता भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं करते हैं तो भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में उनके सहयोगी इतने मजबूत हो चुके हैं कि वे किसी भी चुनाव का रुख बदल सकते है।

अब सवाल ये है कि विगत दो वर्षों में इतना सबकुछ घटित हो गया व भाजपा जिलाध्यक्ष को भनक न लगी हो ऐसा हो नहीं सकता है। तो फिर उन्होंने परम्परागत भाजपा समर्थकों को अरबों रूपयों के ठेकों से वंचित किए जाने का प्रतिकार क्यों नहीं किया होगा । तो इसका भी जवाब यही है कि सरकार का एक वर्ग यही चाहता है कि राम के नाम पर वोट देने वाले भाजपा के परम्परागत वोटर आर्थिक रूप से जीतने कमजोर होंगे, उतने जादा पार्टी के प्रति निष्ठावान रहेंगे। यही कारण है कि जिलाध्यक्ष भी पार्टी के भीतर पैदा हुई इस बाहरी लॉबी के आगे बेबस नजर आ रहे हैं।

अस्वीकरण: उपरोक्त लेख नमो न्यूज के सम्मानित पाठकों के मनोरंजन के निमित लिखा गया है व इसका किसी व्यक्ति विशेष से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेख न किसी व्यक्ति की गरिमा गिराने के लिए लिखा गया है ओर न ही किसी को महिमामंडित करने के निहित लिखा गया है।

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