पुरोला महाविद्यालय में भाजपा जनप्रतिनिधियों की खामियों से पांच साल में पहली बार रुका एवीबीपी का विजय रथ । सत्ता के दलालों के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी । ऋतिक+अजय के बीच बंटा अध्यक्ष पद, चंद्रकांता, राकेश व दिवाकर आदि ने एवीबीपी के पक्ष में की थी जी तोड़ मेहनत । । AVBP's victory chariot stopped for the first time in five years due to the shortcomings of BJP representatives in Purola College. Loud slogans were raised against the power brokers. President's post divided between Hrithik + Ajay.

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

बीएल जुवांठा राजकीय महाविद्यालय पुरोला में विगत 5 वर्ष से लगातार एवीबीपी चुनाव में अपना परचम लहराती आई है । मगर इस बार 6-6 महीने के लिए एवीबीपी को अध्यक्ष पद पर राजी रहने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि दो प्रत्यासियो को बराबर मत पड़े ।


अब सवाल उठता है कि आजतक के सभी चुनावो में एवीबीपी की एक तरफा जीत होती आई है तो इस बार क्या हुआ जो मुश्किल से बराबरी पर ही पहुंच पाये । जहां एवीबीपी से जुड़े छात्र नेता प्रत्याशी को जिताने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे थे तो वहीं बीजेपी के चुने हुए जनप्रतिनिधि व नामांकित प्रतिनिधि पूरे घटनाक्रम में कही भी नजर नही आये ।


   चुनाव में अपनी भागीदारी निभाते हुए भाजपा जनप्रतिनिधि ने अपने सहयोगी नामांकिती प्रतिनिधि के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक आयोजित की थी । किंतु उक्त बैठक में अधिकांस जाती विशेष से संबंधित लोग ही मौजूद रहे । चुनाव घटनाक्रम में उक्त बैठक का एवीबीपी प्रत्याशी के लिए नकारात्मक संदेश गया । भाजपा जनप्रतिनिधि की उक्त बैठक के बाद अन्य जातीय समूह के बीच एक अलिखित सुगबुगाहट हुई जिसके फलस्वरूप अध्यक्ष पद पर एवीबीपी की बराबर के मतों पर संतोष करना पड़ा । 

एवीबीपी को मिले मतों में एक तरफ जहां एवीबीपी की छात्र- छाताओ की बीच गहरी पैठ, संघ की विचारधारा का गहरा प्रभाव, मोदी का नाम व धामी की छवि का अहम रोल था । वही भाजपा जनप्रतिनिधि व नामांकिती जनप्रतिनिधि के खिलाफ उपजे भारी आक्रोश ने विजय रथ की पहिये की 6 महीने की साझेदारी पर रोक दिया ।


ये रहे विजयी

  • अध्यक्ष–ऋतिक चुनार+अजय कुमार
  • उपाध्यक्ष–रोजिता
  • महासचिव–अंजली
  • कोषाध्यक्ष–खुशी नौटियाल
  • सह सचिव–मोहित
  • यूआर–ऋतिक डोभाल

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