गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला
बीएल जुवांठा राजकीय महाविद्यालय पुरोला में विगत 5 वर्ष से लगातार एवीबीपी चुनाव में अपना परचम लहराती आई है । मगर इस बार 6-6 महीने के लिए एवीबीपी को अध्यक्ष पद पर राजी रहने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि दो प्रत्यासियो को बराबर मत पड़े ।
अब सवाल उठता है कि आजतक के सभी चुनावो में एवीबीपी की एक तरफा जीत होती आई है तो इस बार क्या हुआ जो मुश्किल से बराबरी पर ही पहुंच पाये । जहां एवीबीपी से जुड़े छात्र नेता प्रत्याशी को जिताने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे थे तो वहीं बीजेपी के चुने हुए जनप्रतिनिधि व नामांकित प्रतिनिधि पूरे घटनाक्रम में कही भी नजर नही आये ।
चुनाव में अपनी भागीदारी निभाते हुए भाजपा जनप्रतिनिधि ने अपने सहयोगी नामांकिती प्रतिनिधि के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक आयोजित की थी । किंतु उक्त बैठक में अधिकांस जाती विशेष से संबंधित लोग ही मौजूद रहे । चुनाव घटनाक्रम में उक्त बैठक का एवीबीपी प्रत्याशी के लिए नकारात्मक संदेश गया । भाजपा जनप्रतिनिधि की उक्त बैठक के बाद अन्य जातीय समूह के बीच एक अलिखित सुगबुगाहट हुई जिसके फलस्वरूप अध्यक्ष पद पर एवीबीपी की बराबर के मतों पर संतोष करना पड़ा ।
एवीबीपी को मिले मतों में एक तरफ जहां एवीबीपी की छात्र- छाताओ की बीच गहरी पैठ, संघ की विचारधारा का गहरा प्रभाव, मोदी का नाम व धामी की छवि का अहम रोल था । वही भाजपा जनप्रतिनिधि व नामांकिती जनप्रतिनिधि के खिलाफ उपजे भारी आक्रोश ने विजय रथ की पहिये की 6 महीने की साझेदारी पर रोक दिया ।
ये रहे विजयी
- अध्यक्ष–ऋतिक चुनार+अजय कुमार
- उपाध्यक्ष–रोजिता
- महासचिव–अंजली
- कोषाध्यक्ष–खुशी नौटियाल
- सह सचिव–मोहित
- यूआर–ऋतिक डोभाल

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